क्षीरोदमथनोद्भूतमश्वरत्नं ममामरैः । उच्चैःश्रवससंज्ञं तत्प्रणिपत्य समर्पितम् ॥ ११० ॥
kṣhīrodamathanodbhūtamaśhvaratnaṁ mamāmaraiḥ uchchaiḥśhravasasaṁjñaṁ tatpraṇipatya samarpitam
हिंदी अर्थ
क्षीरसागर के मंथन से उत्पन्न उच्चैःश्रवा नाम का अश्वरत्न देवताओं ने मेरे पैरों पर गिरकर मुझे समर्पित किया है।
भावार्थ
वह देवताओं के अपमान की डींग मारता है।
