Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 109

देव्या दूतसंवाद

त्रैलोक्ये वररत्नानि मम वश्यान्यशेषतः । तथैव गजरत्नं च हृत्वा देवेन्द्रवाहनम् ॥ १०९ ॥

trailokye vararatnāni mama vaśhyānyaśheṣhataḥ tathaiva gajaratnaṁ cha hṛitvā devendravāhanam

हिंदी अर्थ

तीनों लोकों के सब श्रेष्ठ रत्न मेरे अधिकार में हैं, और देवराज इन्द्र का वाहन गजरत्न भी मैंने छीनकर ले लिया है।

भावार्थ

गीता प्रेस यहाँ "गजरत्नानि" और "हृतं" पाठान्तर बताता है।