Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 104

देव्या दूतसंवाद

स तत्र गत्वा यत्रास्ते शैलोद्देशेऽतिशोभने । सा देवी तां ततः प्राह श्लक्ष्णं मधुरया गिरा ॥ १०४ ॥

sa tatra gatvā yatrāste śhailoddeśhe’tiśhobhane sā devī tāṁ tataḥ prāha śhlakṣhṇaṁ madhurayā girā

हिंदी अर्थ

वह पर्वत के अत्यंत रमणीय प्रदेश में, जहाँ वे देवी थीं, गया और मधुर वाणी में कोमल वचन बोला।

भावार्थ

गीता प्रेस यहाँ "तां च देवीं ततः" पाठान्तर बताता है।