Bhakti Arohan
भक्ति से उन्नति की ओर
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दुर्गा सप्तशती
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अध्याय 5.105
दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 105
देव्या दूतसंवाद
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दूत उवाच ॥ १०५ ॥
dūta uvācha
हिंदी अर्थ
दूत बोला: