Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 106

देव्या दूतसंवाद

देवि दैत्येश्वरः शुम्भस्त्रैलोक्ये परमेश्वरः । दूतोऽहं प्रेषितस्तेन त्वत्सकाशमिहागतः ॥ १०६ ॥

devi daityeśhvaraḥ śhumbhastrailokye parameśhvaraḥ dūto’haṁ preṣhitastena tvatsakāśhamihāgataḥ

हिंदी अर्थ

"हे देवि! दैत्यराज शुम्भ तीनों लोकों के परमेश्वर हैं। मैं उन्हीं का भेजा हुआ दूत हूँ और यहाँ आपके पास आया हूँ।

भावार्थ

दूत शुम्भ को उन्हीं के सामने "परमेश्वर" कहता है जो वास्तव में परम हैं। यह विडंबना जान-बूझकर है।