Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 103

देव्या दूतसंवाद

इति चेति च वक्तव्या सा गत्वा वचनान्मम । यथा चाभ्येति सम्प्रीत्या तथा कार्यं त्वया लघु ॥ १०३ ॥

iti cheti cha vaktavyā sā gatvā vachanānmama yathā chābhyeti samprītyā tathā kāryaṁ tvayā laghu

हिंदी अर्थ

"मेरी आज्ञा से जाकर उससे ऐसा-ऐसा कहना, और ऐसा उपाय करना कि वह प्रसन्न होकर शीघ्र यहाँ आ जाए।"

भावार्थ

शुम्भ पहले बल के बजाय मनाने का प्रयत्न करता है, यह सोचकर कि देवी चापलूसी से प्रसन्न होंगी।