Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 102

देव्या दूतसंवाद

निशम्येति वचः शुम्भः स तदा चण्डमुण्डयोः । प्रेषयामास सुग्रीवं दूतं देव्या महासुरम् ॥ १०२ ॥

niśhamyeti vachaḥ śhumbhaḥ sa tadā chaṇḍamuṇḍayoḥ preṣhayāmāsa sugrīvaṁ dūtaṁ devyā mahāsuram

हिंदी अर्थ

चण्ड-मुण्ड के ये वचन सुनकर शुम्भ ने महादैत्य सुग्रीव को दूत बनाकर देवी के पास भेजा,

भावार्थ

गीता प्रेस बताता है कि कहीं-कहीं यहाँ "शुम्भ उवाच" जोड़ा जाता है। (यह असुर सुग्रीव रामायण के वानरराज नहीं हैं।)