Bhakti Arohan
भक्ति से उन्नति की ओर
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अध्याय 5.101
दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 101
देव्या दूतसंवाद
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ऋषिरुवाच ॥ १०१ ॥
ṛiṣhiruvācha
हिंदी अर्थ
ऋषि (मेधा) बोले: