Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 26

शक्रादिस्तुति

सौम्यानि यानि रूपाणि त्रैलोक्ये विचरन्ति ते । यानि चात्यर्थघोराणि तै रक्षास्मांस्तथा भुवम् ॥ २६ ॥

saumyāni yāni rūpāṇi trailokye vicharanti te yāni chātyarthaghorāṇi tai rakṣhāsmāṁstathā bhuvam

हिंदी अर्थ

तीनों लोकों में आपके जो सौम्य रूप विचरते हैं और जो अत्यंत भयंकर रूप, उनसे हमारी और पृथ्वी की रक्षा कीजिए।

भावार्थ

उनके सौम्य और भयंकर, दोनों रूपों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। भक्त को दोनों में से किसी से डरना नहीं है।