Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 27

शक्रादिस्तुति

खड्गशूलगदादीनि यानि चास्त्राणि तेऽम्बिके । करपल्लवसङ्गीनि तैरस्मान् रक्ष सर्वतः ॥ २७ ॥

khaḍgaśhūlagadādīni yāni chāstrāṇi te’mbike karapallavasaṅgīni tairasmān rakṣha sarvataḥ

हिंदी अर्थ

हे अम्बिके! आपके कर-पल्लवों में जो खड्ग, शूल, गदा आदि अस्त्र हैं, उन सबसे हमारी सब ओर से रक्षा कीजिए।"

भावार्थ

"करपल्लव" (कोमल पत्तों जैसे हाथ): शस्त्र धारण करते हुए भी उनके हाथों को कोमल बताया गया है। स्तुति विश्वास में समाप्त होती है।