Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 24

शक्रादिस्तुति

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके । घण्टास्वनेन नः पाहि चापज्यानिःस्वनेन च ॥ २४ ॥

śhūlena pāhi no devi pāhi khaḍgena chāmbike ghaṇṭāsvanena naḥ pāhi chāpajyāniḥsvanena cha

हिंदी अर्थ

हे देवि! शूल से हमारी रक्षा कीजिए; हे अम्बिके! खड्ग से भी हमारी रक्षा कीजिए; घंटे की ध्वनि और धनुष की टंकार से भी हमारी रक्षा कीजिए।

भावार्थ

श्लोक 24–27 सरल अनुष्टुप् छंद में बदल जाते हैं और रक्षा-प्रार्थना बन जाते हैं। "शूलेन पाहि नो देवि" का रक्षा के लिए अलग से कवच के रूप में पाठ किया जाता है।