Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 16

शक्रादिस्तुति

धर्म्याणि देवि सकलानि सदैव कर्मा ण्यत्यादृतः प्रतिदिनं सुकृती करोति । स्वर्गं प्रयाति च ततो भवतीप्रसादा ल्लोकत्रयेऽपि फलदा ननु देवि तेन ॥ १६ ॥

dharmyāṇi devi sakalāni sadaiva karmā ṇyatyādṛitaḥ pratidinaṁ sukṛitī karoti svargaṁ prayāti cha tato bhavatīprasādā llokatraye’pi phaladā nanu devi tena

हिंदी अर्थ

हे देवि! आपकी ही कृपा से पुण्यात्मा पुरुष प्रतिदिन अत्यंत श्रद्धा से सब धर्मानुकूल कर्म करता है और उससे स्वर्ग जाता है; इसलिए आप निश्चय ही तीनों लोकों में फल देने वाली हैं।

भावार्थ

अच्छे कर्म करने की क्षमता भी उनकी कृपा की देन है, मानव प्रयास का यह विनम्र दृष्टिकोण पूरी भक्ति में चलता है।