तस्याः खड्गो भुजं प्राप्य पफाल नृपनन्दन । ततो जग्राह शूलं स कोपादरुणलोचनः ॥ ८ ॥
tasyāḥ khaḍgo bhujaṁ prāpya paphāla nṛipanandana tato jagrāha śhūlaṁ sa kopādaruṇalochanaḥ
हिंदी अर्थ
हे राजकुमार! उनकी भुजा पर पहुँचते ही वह तलवार टूट गई। तब क्रोध से लाल आँखें करके उसने शूल उठाया,
भावार्थ
तलवार उनकी भुजा पर टूट जाती है। आसुरी कोई भी शस्त्र उन्हें हानि नहीं पहुँचा सकता। ऋषि सुरथ को "नृपनन्दन" (राजकुमार) कहकर संबोधित करते हैं।
