ततो महासुरो भूयो माहिषं वपुरास्थितः । तथैव क्षोभयामास त्रैलोक्यं सचराचरम् ॥ ३३ ॥
tato mahāsuro bhūyo māhiṣhaṁ vapurāsthitaḥ tathaiva kṣhobhayāmāsa trailokyaṁ sacharācharam
हिंदी अर्थ
तब उस महादैत्य ने फिर भैंसे का शरीर धारण कर लिया और पहले की तरह चर-अचर सहित तीनों लोकों को व्याकुल कर दिया।
भावार्थ
फिर भैंसा, उसका वास्तविक स्वभाव। अहंकार कितने भी रूप ले, वह उसी मूल पर लौट आता है।
