Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 33

महिषासुरवध

ततो महासुरो भूयो माहिषं वपुरास्थितः । तथैव क्षोभयामास त्रैलोक्यं सचराचरम् ॥ ३३ ॥

tato mahāsuro bhūyo māhiṣhaṁ vapurāsthitaḥ tathaiva kṣhobhayāmāsa trailokyaṁ sacharācharam

हिंदी अर्थ

तब उस महादैत्य ने फिर भैंसे का शरीर धारण कर लिया और पहले की तरह चर-अचर सहित तीनों लोकों को व्याकुल कर दिया।

भावार्थ

फिर भैंसा, उसका वास्तविक स्वभाव। अहंकार कितने भी रूप ले, वह उसी मूल पर लौट आता है।