Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 32

महिषासुरवध

करेण च महासिंहं तं चकर्ष जगर्ज च । कर्षतस्तु करं देवी खड्गेन निरकृन्तत ॥ ३२ ॥

kareṇa cha mahāsiṁhaṁ taṁ chakarṣha jagarja cha karṣhatastu karaṁ devī khaḍgena nirakṛintata

हिंदी अर्थ

और अपनी सूँड से उस विशाल सिंह को खींचने और चिंघाड़ने लगा। खींचते समय देवी ने तलवार से उसकी सूँड काट डाली।

भावार्थ

एक बार फिर वह उनके सिंह पर आक्रमण करता है, और एक बार फिर वे बीच में आती हैं।