सा क्षिप्त्वा तस्य वै पाशं तं बबन्ध महासुरम् । तत्याज माहिषं रूपं सोऽपि बद्धो महामृधे ॥ २९ ॥
sā kṣhiptvā tasya vai pāśhaṁ taṁ babandha mahāsuram tatyāja māhiṣhaṁ rūpaṁ so’pi baddho mahāmṛidhe
हिंदी अर्थ
उन्होंने पाश फेंककर उस महादैत्य को बाँध लिया। उस महासंग्राम में बँधकर उसने भैंसे का रूप त्याग दिया।
भावार्थ
श्लोक 29–33 महिष के रूप बदलने का वर्णन करते हैं: भैंसा, सिंह, पुरुष, हाथी और फिर भैंसा। अहंकार बचने के लिए अपना वेश बदलता रहता है।
