वेगभ्रमणविक्षुण्णा मही तस्य व्यशीर्यत । लाङ्गूलेनाहतश्चाब्धिः प्लावयामास सर्वतः ॥ २६ ॥
vegabhramaṇavikṣhuṇṇā mahī tasya vyaśhīryata lāṅgūlenāhataśhchābdhiḥ plāvayāmāsa sarvataḥ
हिंदी अर्थ
उसके वेग और चक्कर से कुचलकर पृथ्वी फटने लगी, और उसकी पूँछ की चोट से समुद्र सब ओर उमड़ पड़ा।
भावार्थ
पृथ्वी और समुद्र दोनों अराजकता में पड़ जाते हैं: असुर का उत्पात स्वयं सृष्टि को संकट में डालता है।
