Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 25

महिषासुरवध

सोऽपि कोपान्महावीर्यः खुरक्षुण्णमहीतलः । शृङ्गाभ्यां पर्वतानुच्चांश्चिक्षेप च ननाद च ॥ २५ ॥

so’pi kopānmahāvīryaḥ khurakṣhuṇṇamahītalaḥ śhṛiṅgābhyāṁ parvatānuchchāṁśhchikṣhepa cha nanāda cha

हिंदी अर्थ

वह महापराक्रमी भी क्रोध से धरती को खुरों से खोदने लगा, सींगों से ऊँचे-ऊँचे पर्वतों को उछालने और गर्जने लगा।

भावार्थ

महिष का क्रोध ब्रह्मांडीय पैमाने का हो जाता है। अगले श्लोक पूरे संसार को काँपते दिखाते हैं।