सोऽपि कोपान्महावीर्यः खुरक्षुण्णमहीतलः । शृङ्गाभ्यां पर्वतानुच्चांश्चिक्षेप च ननाद च ॥ २५ ॥
so’pi kopānmahāvīryaḥ khurakṣhuṇṇamahītalaḥ śhṛiṅgābhyāṁ parvatānuchchāṁśhchikṣhepa cha nanāda cha
हिंदी अर्थ
वह महापराक्रमी भी क्रोध से धरती को खुरों से खोदने लगा, सींगों से ऊँचे-ऊँचे पर्वतों को उछालने और गर्जने लगा।
भावार्थ
महिष का क्रोध ब्रह्मांडीय पैमाने का हो जाता है। अगले श्लोक पूरे संसार को काँपते दिखाते हैं।
