निपात्य प्रमथानीकमभ्यधावत सोऽसुरः । सिंहं हन्तुं महादेव्याः कोपं चक्रे ततोऽम्बिका ॥ २४ ॥
nipātya pramathānīkamabhyadhāvata so’suraḥ siṁhaṁ hantuṁ mahādevyāḥ kopaṁ chakre tato’mbikā
हिंदी अर्थ
गणों की सेना को गिराकर वह असुर महादेवी के सिंह को मारने के लिए झपटा। इससे अम्बिका को बड़ा क्रोध हुआ।
भावार्थ
उनके सिंह पर आक्रमण ही अंततः देवी का क्रोध जगाता है। वे उनकी रक्षा करती हैं जो उनकी सेवा करते हैं।
