उदग्रश्च रणे देव्या शिलावृक्षादिभिर्हतः । दन्तमुष्टितलैश्चैव करालश्च निपातितः ॥ १७ ॥
udagraśhcha raṇe devyā śhilāvṛikṣhādibhirhataḥ dantamuṣhṭitalaiśhchaiva karālaśhcha nipātitaḥ
हिंदी अर्थ
उदग्र को देवी ने रणभूमि में शिलाओं और वृक्षों आदि से मार डाला, और कराल को दाँतों, मुक्कों और थप्पड़ों से धराशायी कर दिया।
भावार्थ
श्लोक 17–20 शेष सेनापतियों और उनके गिरने के ढंग की सूची देते हैं। देवी हर प्रकार के शस्त्र का प्रयोग करती हैं, खाली हाथों का भी।
