ततो वेगात् खमुत्पत्य निपत्य च मृगारिणा । करप्रहारेण शिरश्चामरस्य पृथक्कृतम् ॥ १६ ॥
tato vegāt khamutpatya nipatya cha mṛigāriṇā karaprahāreṇa śhiraśhchāmarasya pṛithakkṛitam
हिंदी अर्थ
तब सिंह बड़े वेग से आकाश में उछला और नीचे आते हुए पंजे के प्रहार से चामर का सिर धड़ से अलग कर दिया।
भावार्थ
चामर देवी से नहीं, सिंह से गिरता है, उनके साथी की शक्ति को दिखाते हुए।
