Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 18

महिषासुरवध

देवी क्रुद्धा गदापातैश्चूर्णयामास चोद्धतम् । बाष्कलं भिन्दिपालेन बाणैस्ताम्रं तथान्धकम् ॥ १८ ॥

devī kruddhā gadāpātaiśhchūrṇayāmāsa choddhatam bāṣhkalaṁ bhindipālena bāṇaistāmraṁ tathāndhakam

हिंदी अर्थ

क्रोधित देवी ने गदा के प्रहारों से उद्धत को चूर्ण कर दिया, भिंदिपाल से बाष्कल को, और बाणों से ताम्र और अन्धक को मार डाला।

भावार्थ

हर असुर के लिए एक आयुध है, मानो युद्ध अध्याय 2 की हर दिव्य देन का प्रदर्शन हो।