Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 13

महिषासुरवध

भग्नां शक्तिं निपतितां दृष्ट्वा क्रोधसमन्वितः । चिक्षेप चामरः शूलं बाणैस्तदपि साच्छिनत् ॥ १३ ॥

bhagnāṁ śhaktiṁ nipatitāṁ dṛiṣhṭvā krodhasamanvitaḥ chikṣhepa chāmaraḥ śhūlaṁ bāṇaistadapi sāchchhinat

हिंदी अर्थ

अपनी शक्ति को टूटकर गिरा देख चामर ने क्रोध से शूल फेंका, और देवी ने उसे भी अपने बाणों से काट डाला।

भावार्थ

एक के बाद एक शस्त्र विफल होते हैं। युद्ध का ढर्रा दोहराता है: आक्रमण, विफलता, क्रोध।