इत्थं निशम्य देवानां वचांसि मधुसूदनः । चकार कोपं शम्भुश्च भ्रुकुटीकुटिलाननौ ॥ ९ ॥
itthaṁ niśhamya devānāṁ vachāṁsi madhusūdanaḥ chakāra kopaṁ śhambhuśhcha bhrukuṭīkuṭilānanau
हिंदी अर्थ
देवताओं के ये वचन सुनकर मधुसूदन (विष्णु) और शम्भु (शिव) क्रोधित हुए, उनकी भौंहें तन गईं और मुख टेढ़े हो गए।
भावार्थ
विष्णु और शिव का क्रोध धर्ममय है: वह अन्याय के विरुद्ध उठता है। इसी प्रज्वलित क्रोध से देवी का रूप बनता है।
