स च सिंहो महानादमुत्सृजन्धुतकेसरः । शरीरेभ्योऽमरारीणामसूनिव विचिन्वति ॥ ६८ ॥
sa cha siṁho mahānādamutsṛijandhutakesaraḥ śharīrebhyo’marārīṇāmasūniva vichinvati
हिंदी अर्थ
और वह सिंह भी अयाल हिलाते हुए ज़ोर से गर्जना करता हुआ मानो देवशत्रुओं के शरीरों से उनके प्राण चुन रहा था।
भावार्थ
सिंह का प्राण "चुनना" एक सजीव चित्र है। सिंह को प्रायः देवी की अपनी प्रचण्ड ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
