Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 67

महिषासुरसैन्यवध

क्षणेन तन्महासैन्यमसुराणां तथाम्बिका । निन्ये क्षयं यथा वह्निस्तृणदारुमहाचयम् ॥ ६७ ॥

kṣhaṇena tanmahāsainyamasurāṇāṁ tathāmbikā ninye kṣhayaṁ yathā vahnistṛiṇadārumahāchayam

हिंदी अर्थ

अम्बिका ने क्षण भर में असुरों की उस विशाल सेना को नष्ट कर दिया, जैसे आग घास और लकड़ी के भारी ढेर को भस्म कर देती है।

भावार्थ

आग और सूखी घास की उपमा दिखाती है कि देवी उस पर कितनी सहजता से विजय पाती हैं जो अजेय लगता था।