देव्या गणैश्च तैस्तत्र कृतं युद्धं महासुरैः । यथैषां तुतुषुर्देवाः पुष्पवृष्टिमुचो दिवि ॥ ६९ ॥
devyā gaṇaiśhcha taistatra kṛitaṁ yuddhaṁ mahāsuraiḥ yathaiṣhāṁ tutuṣhurdevāḥ puṣhpavṛiṣhṭimucho divi
हिंदी अर्थ
देवी के गणों ने वहाँ उन महादैत्यों से ऐसा युद्ध किया कि स्वर्ग में स्थित देवता प्रसन्न हुए और पुष्प-वर्षा करने लगे।
भावार्थ
अध्याय स्वर्ग से पुष्प-वर्षा के साथ समाप्त होता है, दिव्य स्वीकृति का संकेत। गीता प्रेस यहाँ पाठान्तर बताता है ("यथैनां", "तुष्टुवुर्देवाः")।
