सूर्येन्द्राग्न्यनिलेन्दूनां यमस्य वरुणस्य च । अन्येषां चाधिकारान् स स्वयमेवाधितिष्ठति ॥ ६ ॥
sūryendrāgnyanilendūnāṁ yamasya varuṇasya cha anyeṣhāṁ chādhikārān sa svayamevādhitiṣhṭhati
हिंदी अर्थ
"वह सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण तथा अन्य देवताओं के अधिकार छीनकर स्वयं ही सबका अधिष्ठाता बन बैठा है।
भावार्थ
हर देवता प्रकृति के किसी अंश का शासक है: सूर्य, वर्षा, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, मृत्यु, जल। महिष ने सब छीन लिए हैं, इसलिए पूरा ब्रह्मांड असंतुलित है।
