Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 5

महिषासुरसैन्यवध

यथावृत्तं तयोस्तद्वन्महिषासुरचेष्टितम् । त्रिदशाः कथयामासुर्देवाभिभवविस्तरम् ॥ ५ ॥

yathāvṛittaṁ tayostadvanmahiṣhāsuracheṣhṭitam tridaśhāḥ kathayāmāsurdevābhibhavavistaram

हिंदी अर्थ

देवताओं ने उन दोनों से महिषासुर की करतूत और देवताओं की पराजय का पूरा वृत्तांत ज्यों-का-त्यों विस्तार से कह सुनाया।

भावार्थ

"त्रिदश" (तीस) देवताओं का पारंपरिक नाम है (तैंतीस के लिए एक गोल संख्या)। वे ईमानदारी से पूरा वृत्तांत बताते हैं, सहायता की ओर पहला कदम।