Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 53

महिषासुरसैन्यवध

त एव सद्यः सम्भूता गणाः शतसहस्रशः । युयुधुस्ते परशुभिर्भिन्दिपालासिपट्टिशैः ॥ ५३ ॥

ta eva sadyaḥ sambhūtā gaṇāḥ śhatasahasraśhaḥ yuyudhuste paraśhubhirbhindipālāsipaṭṭiśhaiḥ

हिंदी अर्थ

वे तुरंत लाखों गणों के रूप में प्रकट हो गईं, जो फरसों, भिंदिपालों, खड्गों और पट्टिशों से युद्ध करने लगे,

भावार्थ

उनकी साँस ही एक सेना बन जाती है। उनसे निकलने वाली हर चीज़ में उनकी शक्ति होती है।