Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 38

महिषासुरसैन्यवध

पादाक्रान्त्या नतभुवं किरीटोल्लिखिताम्बराम् । क्षोभिताशेषपातालां धनुर्ज्यानिःस्वनेन ताम् ॥ ३८ ॥

pādākrāntyā natabhuvaṁ kirīṭollikhitāmbarām kṣhobhitāśheṣhapātālāṁ dhanurjyāniḥsvanena tām

हिंदी अर्थ

उनके पैरों के भार से पृथ्वी झुकी जा रही थी, उनका मुकुट आकाश को छू रहा था, और धनुष की टंकार से सारे पाताल क्षुब्ध थे,

भावार्थ

पाताल से आकाश तक, उनका रूप पूरे ब्रह्मांड में फैला है, स्वयं ब्रह्मांड के रूप में देवी का दर्शन।