Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 39

महिषासुरसैन्यवध

दिशो भुजसहस्रेण समन्ताद् व्याप्य संस्थिताम् । ततः प्रववृते युद्धं तया देव्या सुरद्विषाम् ॥ ३९ ॥

diśho bhujasahasreṇa samantād vyāpya saṁsthitām tataḥ pravavṛite yuddhaṁ tayā devyā suradviṣhām

हिंदी अर्थ

अपनी हज़ार भुजाओं से चारों ओर सब दिशाओं को व्याप्त करके खड़ी थीं। तब देवी और देवशत्रुओं के बीच युद्ध छिड़ गया,

भावार्थ

यहाँ उनकी हज़ार भुजाएँ हैं; बाद के अध्यायों में प्रायः अठारह या दस का वर्णन आता है। संख्या अनंत सामर्थ्य की ओर संकेत करती है।