Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 37

महिषासुरसैन्यवध

अभ्यधावत तं शब्दमशेषैरसुरैर्वृतः । स ददर्श ततो देवीं व्याप्तलोकत्रयां त्विषा ॥ ३७ ॥

abhyadhāvata taṁ śhabdamaśheṣhairasurairvṛitaḥ sa dadarśha tato devīṁ vyāptalokatrayāṁ tviṣhā

हिंदी अर्थ

और सब असुरों से घिरकर उस शब्द की ओर दौड़ा। तब उसने देवी को देखा, जो अपनी कांति से तीनों लोकों में व्याप्त थीं,

भावार्थ

महिष अंततः देवी को देखता है। अगले दो श्लोक बताते हैं कि वह क्या देखता है, चरणों से मुकुट तक।