तुष्टुवुर्मुनयश्चैनां भक्तिनम्रात्ममूर्तयः । दृष्ट्वा समस्तं संक्षुब्धं त्रैलोक्यममरारयः ॥ ३५ ॥
tuṣhṭuvurmunayaśhchaināṁ bhaktinamrātmamūrtayaḥ dṛiṣhṭvā samastaṁ saṁkṣhubdhaṁ trailokyamamarārayaḥ
हिंदी अर्थ
और भक्ति से विनम्र मुनियों ने उनकी स्तुति की। तीनों लोकों को क्षुब्ध देखकर देवताओं के शत्रु
भावार्थ
एक ही घटना, देवी की गर्जना, मुनियों को आनंद और असुरों को भय देती है। दिव्यता के प्रति कोई कैसी प्रतिक्रिया करता है, यह उसका स्वभाव प्रकट करता है।
