Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 34

महिषासुरसैन्यवध

चचाल वसुधा चेलुः सकलाश्च महीधराः । जयेति देवाश्च मुदा तामूचुः सिंहवाहिनीम् ॥ ३४ ॥

chachāla vasudhā cheluḥ sakalāśhcha mahīdharāḥ jayeti devāśhcha mudā tāmūchuḥ siṁhavāhinīm

हिंदी अर्थ

पृथ्वी डोलने लगी और सब पर्वत हिलने लगे। देवताओं ने प्रसन्न होकर सिंहवाहिनी देवी से कहा, "जय हो!"

भावार्थ

देवताओं का "जय!" घोष आज भी "जय माता दी" और "जय दुर्गे" में गूँजता है। गीता प्रेस यहाँ "सिंहवाहनाम्" पाठान्तर बताता है।