Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 30

महिषासुरसैन्यवध

ददावशून्यं सुरया पानपात्रं धनाधिपः । शेषश्च सर्वनागेशो महामणिविभूषितम् ॥ ३० ॥

dadāvaśhūnyaṁ surayā pānapātraṁ dhanādhipaḥ śheṣhaśhcha sarvanāgeśho mahāmaṇivibhūṣhitam

हिंदी अर्थ

धनपति कुबेर ने सदा मधु से भरा पानपात्र दिया, और सब नागों के स्वामी शेष ने,

भावार्थ

यह सदा भरा रहने वाला पात्र वही है जिससे वे 3.33–34 में महिष-वध से पहले पान करती हैं।