Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 27

महिषासुरसैन्यवध

अङ्गुलीयकरत्नानि समस्तास्वङ्गुलीषु च । विश्वकर्मा ददौ तस्यै परशुं चातिनिर्मलम् ॥ २७ ॥

aṅgulīyakaratnāni samastāsvaṅgulīṣhu cha viśhvakarmā dadau tasyai paraśhuṁ chātinirmalam

हिंदी अर्थ

और सब अँगुलियों के लिए रत्नजड़ित अँगूठियाँ। विश्वकर्मा ने उन्हें अत्यंत निर्मल फरसा दिया,

भावार्थ

दिव्य शिल्पी विश्वकर्मा उन्हें फरसा देते हैं: देवताओं के कारीगर भी योगदान करते हैं।