Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 28

महिषासुरसैन्यवध

अस्त्राण्यनेकरूपाणि तथाभेद्यं च दंशनम् । अम्लानपङ्कजां मालां शिरस्युरसि चापराम् ॥ २८ ॥

astrāṇyanekarūpāṇi tathābhedyaṁ cha daṁśhanam amlānapaṅkajāṁ mālāṁ śhirasyurasi chāparām

हिंदी अर्थ

अनेक प्रकार के अस्त्र, अभेद्य कवच, और सिर तथा वक्षःस्थल पर धारण करने के लिए कभी न मुरझाने वाले कमलों की मालाएँ दीं।

भावार्थ

कभी न मुरझाने वाले कमल: उनकी शक्ति की तरह उनका सौंदर्य भी काल से परे है।