अस्त्राण्यनेकरूपाणि तथाभेद्यं च दंशनम् । अम्लानपङ्कजां मालां शिरस्युरसि चापराम् ॥ २८ ॥
astrāṇyanekarūpāṇi tathābhedyaṁ cha daṁśhanam amlānapaṅkajāṁ mālāṁ śhirasyurasi chāparām
हिंदी अर्थ
अनेक प्रकार के अस्त्र, अभेद्य कवच, और सिर तथा वक्षःस्थल पर धारण करने के लिए कभी न मुरझाने वाले कमलों की मालाएँ दीं।
भावार्थ
कभी न मुरझाने वाले कमल: उनकी शक्ति की तरह उनका सौंदर्य भी काल से परे है।
