Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 20

महिषासुरसैन्यवध

शूलं शूलाद्विनिष्कृष्य ददौ तस्यै पिनाकधृक् । चक्रं च दत्तवान् कृष्णः समुत्पाद्य स्वचक्रतः ॥ २० ॥

śhūlaṁ śhūlādviniṣhkṛiṣhya dadau tasyai pinākadhṛik chakraṁ cha dattavān kṛiṣhṇaḥ samutpādya svachakrataḥ

हिंदी अर्थ

पिनाकधारी शिव ने अपने शूल से एक शूल निकालकर उन्हें दिया, और श्रीकृष्ण (विष्णु) ने अपने चक्र से एक चक्र उत्पन्न करके दिया।

भावार्थ

हर देवता अपने आयुध से देता है, बिना उसे खोए: शूल से नया शूल, चक्र से नया चक्र। बाँटी गई दिव्य शक्ति कम नहीं होती।