Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 14

महिषासुरसैन्यवध

यदभूच्छाम्भवं तेजस्तेनाजायत तन्मुखम् । याम्येन चाभवन् केशा बाहवो विष्णुतेजसा ॥ १४ ॥

yadabhūchchhāmbhavaṁ tejastenājāyata tanmukham yāmyena chābhavan keśhā bāhavo viṣhṇutejasā

हिंदी अर्थ

शिव के तेज से उनका मुख बना; यम के तेज से केश, और विष्णु के तेज से भुजाएँ;

भावार्थ

श्लोक 14–18 बताते हैं कि हर देवता की ऊर्जा उनके शरीर का एक अंग कैसे बनी। हर देन अपने दाता के अनुरूप है: रक्षा करने वाली भुजाएँ पालनकर्ता विष्णु से आती हैं।