Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 15

महिषासुरसैन्यवध

सौम्येन स्तनयोर्युग्मं मध्यं चैन्द्रेण चाभवत् । वारुणेन च जङ्घोरू नितम्बस्तेजसा भुवः ॥ १५ ॥

saumyena stanayoryugmaṁ madhyaṁ chaindreṇa chābhavat vāruṇena cha jaṅghorū nitambastejasā bhuvaḥ

हिंदी अर्थ

चन्द्रमा के तेज से दोनों स्तन, इन्द्र के तेज से कटि, वरुण के तेज से जंघा और पिंडलियाँ, और पृथ्वी के तेज से नितंब बने।

भावार्थ

पोषण करने वाले स्तन सौम्य चन्द्रमा से आते हैं; स्थिर नितंब दृढ़ पृथ्वी से। देवी का शरीर संपूर्ण प्रकृति है।