Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 39

फलस्तुति

सैव काले महामारी सैव सृष्टिर्भवत्यजा । स्थितिं करोति भूतानां सैव काले सनातनी ॥ ३९ ॥

saiva kāle mahāmārī saiva sṛiṣhṭirbhavatyajā sthitiṁ karoti bhūtānāṁ saiva kāle sanātanī

हिंदी अर्थ

वे ही समय-समय पर महामारी होती हैं, और वे ही स्वयं अजन्मा होते हुए भी सृष्टि के रूप में प्रकट होती हैं। वे सनातनी देवी ही समयानुसार सब भूतों की रक्षा करती हैं।

भावार्थ

संहार, सृष्टि और पालन, सब एक ही देवी।