Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 38

फलस्तुति

व्याप्तं तयैतत्सकलं ब्रह्माण्डं मनुजेश्वर । महाकाल्या महाकाले महामारीस्वरूपया ॥ ३८ ॥

vyāptaṁ tayaitatsakalaṁ brahmāṇḍaṁ manujeśhvara mahākālyā mahākāle mahāmārīsvarūpayā

हिंदी अर्थ

राजन्! महाप्रलय के समय महामारी का स्वरूप धारण करने वाली वे महाकाली ही इस समस्त ब्रह्मांड में व्याप्त हैं।

भावार्थ

गीता प्रेस यहाँ "महामारी" को महाप्रलय के समय उनके धारण किए स्वरूप के रूप में समझाता है।