तयैतन्मोह्यते विश्वं सैव विश्वं प्रसूयते । सा याचिता च विज्ञानं तुष्टा ऋद्धिं प्रयच्छति ॥ ३७ ॥
tayaitanmohyate viśhvaṁ saiva viśhvaṁ prasūyate sā yāchitā cha vijñānaṁ tuṣhṭā ṛiddhiṁ prayachchhati
हिंदी अर्थ
वे ही इस विश्व को मोहित करती हैं, वे ही जगत को जन्म देती हैं, और वे ही प्रार्थना करने पर संतुष्ट होकर विज्ञान और समृद्धि प्रदान करती हैं।
भावार्थ
विज्ञान और ऋद्धि: वे मुक्तिदायक ज्ञान और सांसारिक समृद्धि, दोनों देती हैं। यह अध्याय 13 में महत्वपूर्ण होगा, जहाँ वैश्य पहला और राजा दूसरा माँगते हैं।
