Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 8

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते । स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ८ ॥

sarvasya buddhirūpeṇa janasya hṛidi saṁsthite svargāpavargade devi nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

बुद्धि रूप से सब लोगों के हृदय में विराजमान रहने वाली, स्वर्ग और मोक्ष देने वाली नारायणी देवि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

यहाँ से "नारायणि नमोऽस्तु ते" की टेक शुरू होती है, जो श्लोक 8 से 23 तक हर श्लोक के अंत में आती है और इसी से इस स्तुति का लोकप्रिय नाम पड़ा।