Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 9

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

कलाकाष्ठादिरूपेण परिणामप्रदायिनि । विश्वस्योपरतौ शक्ते नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ ९ ॥

kalākāṣhṭhādirūpeṇa pariṇāmapradāyini viśhvasyoparatau śhakte nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

कला, काष्ठा आदि के रूप से क्रमशः परिणाम (अवस्था-परिवर्तन) की ओर ले जाने वाली और विश्व का उपसंहार करने में समर्थ नारायणि! तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

कला और काष्ठा समय की छोटी इकाइयाँ हैं। देवी स्वयं काल हैं, जो सबको बदलता है और अंत में सबका अंत करता है।