सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १० ॥
sarvamaṅgalamaṅgalye śhive sarvārthasādhike śharaṇye tryambake gauri nārāyaṇi namo’stu te
हिंदी अर्थ
सब मंगलों में मंगलमयी, कल्याणकारी शिवा, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी नारायणि! तुम्हें नमस्कार है।
भावार्थ
"सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके": सम्भवतः सप्तशती का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला श्लोक, जो अनगिनत पूजाओं और आरतियों के अंत में गाया जाता है। गीता प्रेस यहाँ "माङ्गल्ये" पाठान्तर बताता है।
