Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 49

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

शाकम्भरीति विख्यातिं तदा यास्याम्यहं भुवि । तत्रैव च वधिष्यामि दुर्गमाख्यं महासुरम् ॥ ४९ ॥

śhākambharīti vikhyātiṁ tadā yāsyāmyahaṁ bhuvi tatraiva cha vadhiṣhyāmi durgamākhyaṁ mahāsuram

हिंदी अर्थ

तब पृथ्वी पर "शाकम्भरी" नाम से मेरी ख्याति होगी। उसी अवतार में मैं दुर्गम नामक महादैत्य का वध भी करूँगी।

भावार्थ

"शाकम्भरी" (शाक धारण करने वाली) की पूजा आज भी होती है, जैसे सहारनपुर के पास और राजस्थान के शाकम्भरी मंदिरों में।