Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 48

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

ततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः । भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः ॥ ४८ ॥

tato’hamakhilaṁ lokamātmadehasamudbhavaiḥ bhariṣhyāmi surāḥ śhākairāvṛiṣhṭeḥ prāṇadhārakaiḥ

हिंदी अर्थ

देवताओ! तब मैं अपने शरीर से उत्पन्न शाकों द्वारा समस्त संसार का भरण-पोषण करूँगी; जब तक वर्षा नहीं होगी, तब तक वे शाक ही सबके प्राण बचाएँगे।

भावार्थ

देवी अपने ही शरीर से संसार को भोजन देती हैं।