ततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः । भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः ॥ ४८ ॥
tato’hamakhilaṁ lokamātmadehasamudbhavaiḥ bhariṣhyāmi surāḥ śhākairāvṛiṣhṭeḥ prāṇadhārakaiḥ
हिंदी अर्थ
देवताओ! तब मैं अपने शरीर से उत्पन्न शाकों द्वारा समस्त संसार का भरण-पोषण करूँगी; जब तक वर्षा नहीं होगी, तब तक वे शाक ही सबके प्राण बचाएँगे।
भावार्थ
देवी अपने ही शरीर से संसार को भोजन देती हैं।
