Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 47

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

ततः शतेन नेत्राणां निरीक्षिष्यामि यन्मुनीन् । कीर्तयिष्यन्ति मनुजाः शताक्षीमिति मां ततः ॥ ४७ ॥

tataḥ śhatena netrāṇāṁ nirīkṣhiṣhyāmi yanmunīn kīrtayiṣhyanti manujāḥ śhatākṣhīmiti māṁ tataḥ

हिंदी अर्थ

और मैं सौ नेत्रों से मुनियों को देखूँगी, इसलिए मनुष्य "शताक्षी" नाम से मेरा कीर्तन करेंगे।

भावार्थ

"शताक्षी", सौ नेत्रों वाली।